Makar Sankranti Festival मकर संक्रांति


मकर संक्रांति: सूर्य की यात्रा, खुशियाँ और संस्कृति का पर्व

मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है जिसे हर साल अक्टूबर-दिसंबर के बजाय ग्रहों की चाल के हिसाब से 14 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन सूर्य के मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश (उत्तरायण) को दर्शाता है, जो शीतकाल के बाद नए उजाले और ऊर्जा की शुरुआत का प्रतीक है।

 क्या है मकर संक्रांति?

‘संक्रांति’ शब्द का अर्थ है गति या संक्रमण — यानी जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति के दिन, सूर्य मकर राशि में प्रवेश करके उत्तरी दिशा की ओर बढ़ना शुरू करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। इसे जीवन में सकारात्मक बदलाव, नई शुरुआत और प्रकाश की ओर उन्नति का संकेत माना जाता है।

यह त्योहार केवल एक धार्मिक दिन ही नहीं, बल्कि कृषि, मौसम और जीवन-चक्र के परिवर्तन का प्रतीक भी है। बहुत पुराने समय से इसे सूर्य देव की पूजा और फसल की कटाई में कृतज्ञता व्यक्त करने के रूप में मनाया जाता रहा है। 

कैसे मनाते हैं लोग यह पर्व?

1. पतंग उड़ाना (Kite Flying)

उत्तरी भारत खासकर गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में आकाश रंगीन पतंगों से भर जाता है। पतंगों की प्रतिस्पर्धा और दोस्त-रिश्तेदारों के साथ समय बिताना इस दिन का एक आनंददायक हिस्सा है। 

2. पवित्र स्नान और पूजा

लोग गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य कमाते हैं और सूर्य को अर्श्चन करते हैं। माना जाता है कि इससे पापों का नाश और जीवन में शुभफल मिलता है।

3. दान-दक्षिणा (Charity & Sharing)

इस दिन तिल, गुड़, अनाज, कपड़े और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है। यह परंपरा इंसान में आत्मा के अंदर उदारता और आत्मीयता लाती है। 

त्योहार के खास व्यंजन

मकर संक्रांति का स्वाद भी उतना ही खास है जितना इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व। सर्दी में शरीर को गर्म रखने और परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए कई परंपरागत व्यंजन बनाए जाते हैं।

तिलगुल/तिल लड्डू – तिल और गुड़ से बने मीठे लड्डू, “तिळगुळ घ्या, गोड बोल्या बोला” कहकर बांटे जाते हैं।

गुल पोलि / पोंगल / खिचड़ी – अलग-अलग राज्यों में अलग व्यंजन परोसे जाते हैं जो स्वाद के साथ परंपरा को भी दर्शाते हैं। 

पटिशपता, पिठा, उंधियु जैसे क्षेत्रीय व्यंजन भी खूब खाए जाते हैं। 

इन व्यंजनों में मुख्यत: तिल, गुड़, चावल और दालें होती हैं — जो शरीर को गर्म रखने के साथ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती हैं। 

मकर संक्रांति का संदेश

मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं है — यह प्रकृति, कृषि, ऊर्जा और मानव जीवन के बीच के गहरे बंधन का उत्सव है। ये दिन हमें याद दिलाता है कि हर अँधेरी रात के बाद उजाला आता है, और हर कठिन समय के बाद जीवन में नई उम्मीदें पनपती हैं।